भाजपा गठबंधन सरकार की मंशा किसानों को भूमिहीन कर टैक्स के दायरे में लाने की है: अभय सिंह चौटाला

भाजपा गठबंधन सरकार की मंशा किसानों को भूमिहीन कर टैक्स के दायरे में लाने की है: अभय सिंह चौटाला

भाजपा गठबंधन सरकार की मंशा किसानों को भूमिहीन कर टैक्स के दायरे में लाने की है: अभय सिंह चौटाला

पहले तीन काले कृषि कानून, फिर भूमि अधिग्रहण (संशोधन) 2021 बिल और अब कृषि भूमि की न्यूनतम सीमा तय कर किसानों से किसानी का हक छिनने का षड्यंत्र रच रही भाजपा सरकार

कहा- एक तरफ तो भाजपा सरकार ढिंढोरा पीटती है कि तीन कृषि कानून छोटे किसानों के फायदे के लिए है और दूसरी तरफ छोटे किसानों को ही खत्म करने जा रही है

चंडीगढ़, 31 अगस्त: इंडियन नेशनल लोकदल के प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला ने केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा बनाए गए तीन काले कृषि कानूनों की आड़ में किसानों की जमीनों को छिनने की जो आशंका जताई थी उस पर प्रदेश की भाजपा गठबंधन सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनव्र्यवस्थापन (हरियाणा संशोधन) बिल 2021 को विधानसभा में पास कर मोहर लगा दी है। पहले तीन काले कृषि कानून, फिर भूमि अधिग्रहण (संशोधन) 2021 बिल और अब कृषि भूमि की न्यूनतम सीमा तय कर किसानों से किसानी का हक छीनने का षड्यंत्र रच रही भाजपा गठबंधन सरकार।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रेस वार्ता कर यह बयान दिया है कि प्रदेश में अब कृषि भूमि का रेशनेलाइजेशन कर उसकी न्यूनतम सीमा निर्धारित की जाएगी जिसमें यह तय किया जाएगा कि कम से कम कितनी जमीन को कृषि भूमि माना जाएगा। अगर ऐसा किया गया तो जो छोटे किसान हैं वो कृषि भूमि पर खेती करने से और भी घाटे में आ जाएंगे। सरकार छोटे किसानों को कृषि यंत्रों पर सबसिडी, कर्ज और सम्मान निधि जैसे फायदे देती है, उन्हें पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा। एक तरफ तो भाजपा सरकार ढिंढोरा पीटती है कि तीन कृषि कानून छोटे किसानों के फायदे के लिए हंै और दूसरी तरफ छोटे किसानों को ही खत्म करने जा रही है। भाजपा सरकार किसानों को परंपरागत खेती से हटकर वैकल्पिक खेती करने पर जोर दे रही है जबकि प्रदेश में ज्यादातर किसान छोटी जोत वाले हैं जो सब्जियों और फूलों की खेती कर अपना पेट पालते हैं लेकिन कृषि भूमि के रेशनेलाइजेशन के बाद वो इनकी खेती करने से पूरी तरह से वंचित हो जाएंगे। भाजपा गठबंधन सरकार की मंशा पूरी तरह से किसान विरोधी है और किसानों को टैक्स के दायरे में लाने की है।
किसान नौ महीने से तीन काले कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलनरत है जिसमें 600 से ज्यादा किसान शहीद हो चुके हैं और भाजपा सरकार बजाय किसानों की मांगों को मानने के भूमि अधिग्रहण अधिनियम में संशोधन और कृषि भूमि का रेशनेलाइजेशन कर आग में घी डालने का काम कर रही है। किसानों को उसकी कृषि भूमि से बेदखल करना और अपने ही खेतों में मजदूर बनाना भाजपा गठबंधन सरकार का असली मकसद है।