Haryana BJP JJP: हरियाणा में बीजेपी जेजेपी का टूटने वाला है गठबंधन !, जान लीजिए अंदर की खबर

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Haryana BJP JJP: हरियाणा में बीजेपी जेजेपी का टूटने वाला है गठबंधन !, जान लीजिए अंदर की खबर

हरियाणा में बीजेपी जेजेपी का टूटने वाला है गठबंधन


 

हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी के ज्यादातर नेता लोकसभा और विधानसभा चुनाव जननायक जनता पार्टी (JJP) के साथ मिलकर लड़ने के पक्ष में नहीं हैं। इन नेताओं का मत है कि पार्टी को ये दोनों चुनाव अकेले अपने बूते पर लड़ने चाहिए।

BJP की ओर से चुनावी तैयारियों के सिलसिले में 2 दिन पहले पंचकूला में बुलाई गई कोर कमेटी की मीटिंग में यह मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। मीटिंग में शामिल नेताओं के बीच ‘पाॅइंट ऑफ डिस्कशन’ में एक सवाल था- राज्य में सहयोगी के साथ मिलकर चुनाव लड़ें या फिर एकला चलो की नीति पर चलते हुए रण में उतरा जाए।

मीटिंग में शामिल हरियाणा के ज्यादातर नेता इस बात के पक्ष में थे कि बिना किसी सहयोगी के चुनाव मैदान में उतरा जाए।

अकेले चुनाव लड़ने के पीछे 4 तर्क

1. जाट वोट 2 नहीं, 3 जगह बटेंगे
हरियाणा में BJP गैर-जाट की राजनीति करती है। प्रदेश की आबादी में जाटों की तादाद लगभग 25% है। मौजूदा हालात में जाट वोटर भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा की अगुवाई में कांग्रेस और पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला की पार्टी- इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) में बंटे हुए दिख रहे हैं। BJP के साथ सरकार में शामिल JJP की राजनीति भी जाटों के इर्द-गिर्द ही घूमती है।

जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान 2016 में हुई हिंसा के बाद 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के वोटिंग पैटर्न पर नजर डाली जाए तो जाटों ने BJP के खिलाफ एकतरफा वोट डाले। BJP अगर JJP से गठजोड़ तोड़ लेती है तो जाटों के कुछ वोट कांग्रेस-इनेलो के साथ-साथ JJP के हिस्से में भी जाएंगे। जाट वोटों का तीन जगह बिखराव होने का फायदा BJP को मिल सकता है।

2.JJP पर भ्रष्टाचार के आरोप
भाजपा के साथ सवा 4 साल से हरियाणा सरकार में शामिल जननायक जनता पार्टी (JJP) के कई नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। शराब और रजिस्ट्रियों में भ्रष्टाचार को लेकर JJP नेताओं पर सवाल उठते रहे हैं। BJP के ही बड़े जाट नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह तो 8 माह से लगातार खुलेआम करप्शन के लिए JJP के बड़े चेहरों को घेरते आ रहे हैं।

हालांकि बीरेंद्र सिंह की इस मुखालफत की प्रमुख वजह जींद जिले की उचाना सीट भी है। ये बीरेंद्र सिंह की परंपरागत सीट है लेकिन 2019 के विधानसभा चुनाव में JJP के दुष्यंत चौटाला के सामने उनकी पत्नी प्रेमलता यहां हार गई थीं। बीरेंद्र सिंह हरियाणा में जिस बांगर इलाके (जींद और उससे लगता एरिया) की राजनीति करते हैं, वहां JJP भी अच्छा प्रभाव रखती है।

कोर कमेटी की मीटिंग में BJP के ज्यादातर नेताओं के अकेले चुनाव लड़ने की बात कहने के बाद आने वाले दिनों में बीरेंद्र सिंह JJP पर अपने हमले और तेज कर सकते हैं। बीरेंद्र सिंह ने JJP पर जब भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, BJP के तमाम नेताओं ने चुप्पी साधे रखी। जाहिर है कि भाजपा भी भविष्य में JJP को जरूरत पड़ने पर घेरने लायक जगह की गुंजाइश रखकर चल रही है।

3. मल्टी-एंगल लड़ाई में जीत के ज्यादा चांस
हरियाणा भाजपा इकाई के ज्यादातर पदाधिकारियों का मत है कि पार्टी को गठजोड़ करके किसी पार्टी के साथ सीट शेयरिंग करने की बजाय सभी सीटों पर अपने कैंडिडेट उतारने चाहिए। अगर BJP किसी पार्टी से गठबंधन नहीं करती तो विधानसभा चुनाव में उसके अलावा कांग्रेस, इनेलो, आम आदमी पार्टी और JJP के कैंडिडेट आमने-सामने होंगे। एक-आध सीट पर कोई मजबूत निर्दलीय चेहरा भी देखने को मिल सकता है। इस तरह की बहुकोणीय लड़ाई वाले चुनाव में BJP उम्मीदवारों की राह आसान हो सकती है क्योंकि गैरजाट की राजनीति करने के कारण समाज की बाकी 35 बिरादरियों में पार्टी का अच्छा-खासा वोट बैंक है।

वहीं भाजपा अगर JJP के साथ गठजोड़ करके चुनाव में उतरती है तो JJP उसे जाटों के वोट दिलवा पाएगी, इसमें संदेह है।

4. पोस्ट-पोल अलायंस के लिए ज्यादा ऑप्शन
BJP के कुछ नेताओं का तर्क है कि अकेले चुनाव लड़कर अगर 2019 की तरह पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाता और JJP या इनेलो के कुछ विधायक जीतकर आ जाते हैं तो पार्टी के पास उनके साथ गठबंधन करने का ऑप्शन खुला रहेगा।

पार्टी उस समय के हालात के हिसाब से फैसला ले पाएगी। ऐसे में पार्टी को प्री-पोल अलायंस करके चुनाव में उतरने की जगह पोस्ट-पोल अलायंस के ऑप्शन को एक्सप्लोर करना चाहिए। भाजपा हरियाणा में पहले भी ओमप्रकाश चौटाला की अगुवाई वाली सरकार में शामिल रह चुकी है। हालांकि उस समय BJP छोटे भाई और इनेलो बड़े भाई की भूमिका में रहती थी।

6 जनवरी को पंचकूला में हरियाणा भाजपा की कोर कमेटी की मीटिंग हुई थी। इसकी अध्यक्षता बीजेपी उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा ने की थी। इसमें कई मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

अंतिम फैसला दिल्ली में होगा
हालांकि हरियाणा भाजपा की कोर कमेटी की मीटिंग में इस मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया। बैठक लेने आए केंद्रीय नेताओं ने सभी की राय सुनी और अब पार्टी हाईकमान को इससे अवगत कराया जाएगा। अंतिम फैसला दिल्ली के स्तर पर ही होगा।

2019 में ‘75 पार’ का नारा देकर 40 पर सिमट गई थी BJP
वर्ष 2014 में BJP ने सभी विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ते हुए 47 सीटें जीतकर हरियाणा में पहली दफा, अपने बूते पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में राज्य की सभी 10 सीटें जीतने के बाद BJP का कॉन्फिडेंस सातवें आसमान पर पहुंच गया। उसने 2019 के लोकसभा चुनाव के 5 महीने बाद हुए राज्य विधानसभा चुनाव में ‘75 पार’ का नारा दिया, लेकिन पार्टी बहुमत के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच पाई और 40 सीटों पर सिमट गई।

तब सालभर पहले बनी JJP ने 10 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। नतीजा- सरकार बनाने के लिए BJP को JJP से गठबंधन करना पड़ा। निर्दलीय जीतकर आए 5 से ज्यादा विधायक भी BJP के साथ आ गए।

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