Strawberry Cultivation: हरियाणा के गांव स्याहड़वा की स्ट्रॉबेरी विदेशों में बनी पहली पसंद, किसान बंपर खेती से कर रहे लाखों की कमाई

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Strawberry Cultivation: हरियाणा के गांव स्याहड़वा की स्ट्रॉबेरी विदेशों में बनी पहली पसंद, किसान बंपर खेती से कर रहे लाखों की कमाई

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 Strawberry Cultivation: हरियाणा के हिसार जिले के स्याहड़वा गांव में स्ट्रॉबेरी की खेती एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पादन बन चुका है और यह विदेशों में भी पहचान बना रखा है। इस उत्पादन की शुरुआत 1996 में हुई थी जब हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. अनिल गोदारा ने स्थानीय किसानों के साथ मिलकर इसे आरंभ किया। 

उन्होंने स्याहड़वा गांव की ज़मीन का उपयोग कर स्ट्रॉबेरी की खेती में सफलता प्राप्त की और इसे गांव के किसानों में फैलाया। स्याहड़वा गांव में इस समय 300 से ज्यादा परिवार स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं और आसपास के गांवों में भी इसमें रुचि बढ़ी है। चनाना, हरिता, और मिरान जैसे गांवों के किसान भी इसे आधार बनाकर स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं, और इसमें सफलता प्राप्त कर रहे हैं।

गांव के किसान बता रहे हैं कि स्ट्रॉबेरी की खेती में एक एकड़ पर लगभग 4 लाख रुपये का खर्च आता है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है। स्याहड़वा गांव का स्ट्रॉबेरी विदेशों, विशेषकर यूरोप के विभिन्न देशों में सप्लाई हो रहा है।

गांववाले बता रहे हैं कि स्ट्रॉबेरी की फसल नवंबर महीने तक पूरी तरह पूरी हो जाती है और इसकी बाजार में डिमांड होती है। प्रति एकड़ से 4 से 5 लाख तक का मुनाफा कमाया जा सकता है, और यह भारतीय किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प बन रहा है।

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