Success Story: हरियाणा की श्रीपर्णा ने 200 महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर, जोया अख्तर की फिल्म " द आर्चीज " में इस्तेमाल हुई पोशाकों ने दी नई पहचान

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Success Story: हरियाणा की श्रीपर्णा ने 200 महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर, जोया अख्तर की फिल्म " द आर्चीज " में इस्तेमाल हुई पोशाकों ने दी नई पहचान

Success Story: हरियाणा की श्रीपर्णा ने 200 महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर, जोया अख्तर की फिल्म " द आर्चीज " में इस्तेमाल हुई पोशाकों ने दी नई पहचान


 Success Story: हरियाणा के गुरुग्राम जिले की रहने वाली श्रीपर्णा की क्रोशिये से बनी पोशाक अब बॉलीवुड में भी धाक जमा रही है। जोया अख्तर की हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म  "द आर्चीज " में उनकी बनाई ये पोशाक सुहाना खान व अन्य सह कलाकारों द्वारा पहनी गई है। यह सफलता की कहानी तो सिर्फ श्रीपर्णा की है, लेकिन हरियाणा की जागरूक महिलाएं आज मनोहर सरकार में महिलाओं में सशक्तिकरण व स्वालम्बन के लिए बनाई गई नीतियों का लाभ लेकर आगे बढ़ रही हैं। साथ ही साथ दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन कर उभर रही हैं।

स्टॉल पर 30 से अधिक प्रोडक्ट शामिल

दिल्ली स्थित प्रगति मैदान में आयोजित आत्मनिर्भर भारत उत्सव 2024 में गुरुग्राम की श्रीपर्णा का स्टॉल अमानी क्रोशेंट बहुत लोकप्रिय हो रहा है। पुरानी हो चुकी क्रोशिये की कला को नये ढंग से पेश करती उनकी इस कला में ऊन से बने बच्चों के खिलौने, कप कोजी, चाबी के छल्ले, लक्ष्मी गणेश की क्रोशिये से बनी मूर्ति, टिश्यू बॉक्स, टोपियां, वॉल हैंग्गिंस, प्लांट हैंगर्स सहित 30 से अधिक प्रोडक्ट शामिल हैं। साथ ही मैक्रामे से बने हैंड बैग भी स्टॉल पर खूब खरीदे जा रहे हैं।

श्रीपर्णा अपने इस सफर की यादों को साझा करते हुए कहती हैं कि आज से 10 साल पहले मैं ग्राफ़िक डिज़ाइनर के रूप में एक फर्म में काम कर रही थी। उस दौरान पता चला कि परिवार अब बढ़ने वाला है। घर में नन्हे बच्चे की किलकारी गूंजने वाली है। यह सोच कर कि अब यह समय मुझे अपने व अपने परिवार के लिए देना है। मैने नौकरी छोड़ने का फैसला किया। लेकिन ये फैसला इतना आसान भी नहीं था, क्योंकि परिवार बढ़ने के साथ-साथ घर खर्च भी अब बढ़ने वाला था। तभी सोचा कि क्यों ना घर बैठकर ही कुछ ऐसा किया जाए जिससे अपने परिवार की देखभाल भी हो और जो धन उपार्जन का जरिया भी बन जाए।

पुरानी क्रोशिये की कला को आधुनिकता के रंग में ढ़ाल किया अपना व्यापार शुरू

वह बताती हैं कि आज के आधुनिक दौर में हम पुरानी कला की कही पीछे छोड़ते जा रहे हैं। मुझे आइडिया आया कि क्यों ना इस क्रोशिये की कला को आधुनिकता के रंग में ढ़ाल कर समाज को परोसा जाए। बस फिर क्या था, मैंने क्रोशिये चलाने का प्रशिक्षण लिया। वैसे तो बचपन में हमने स्कूल में कला विज्ञान की कक्षा में यह क्रोशिया चलाना सीखा था लेकिन इसको बिज़नेस के रूप में इस्तेमाल करने के किये क्रोशिये में महारत हासिल करना जरुरी था।

गुणवत्ता को प्राथमिकता दी कि जो भी सामान बनाया जाये वह बेहतरीन हो

वे कहती हैं कि शुरुआती दौर में आस-पास के लोग मेरा बनाया यह सामान खरीद रहे थे। धीरे-धीरे लोगों को यह सामान बेहद पसंद आने लगे। मेरे इस काम का प्रचार मेरे अपने ग्राहक ही कर रहे थे। प्रचार के साथ-साथ आर्डर की मात्रा अब बढ़ रही थी। लोग पैसा खर्च करने को तैयार थे यदि उनके मन मुताबिक सामान उन्हे मिले तो। मैने इस बात को प्राथमिकता दी कि जो भी सामान मेरे द्वारा बनाया जाये वह बेहतरीन हो। लगातार मेरे बनाए सामान की मांग बढ़ रही थी और उस मांग को मैं अकेली पूरा करने में असक्षम थी। मांग बढ़ने पर मैने हरियाणा के सोहना के आस पास के गांव में रहने वाली महिलाओं से संपर्क साधा। जिन्हे क्रोशिया चलना आता था। उन महिलाओं की मदद से मैने आने वाले सभी आर्डर को पूरा करना शुरू किया।

अकेले इस सफर की शुरुआत कर आज 200 महिलाओं को बना रही आत्मनिर्भर

श्रीपर्णा कहती हैं कि हमारा फोकस शुरू से ही सामान की गुणवत्ता पर रहा है इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते  हुए हमने लगातार इस दिशा में काम किया। शुरू में हमने डी2सी यानि डायरेक्ट-टू-कस्टमर के माध्यम से अपना सामान लोगों तक पहुँचाया। आज हम बी2सी (बिज़नेस टू कस्टमर ) और बी2बी (बिज़नेस टू बिज़नेस) के माध्यम से अपना सामान ग्राहकों को मुहैया करवा रहे हैं। हमारा टाई-अप विटामिन डी ब्रांड से हुआ है, जिसमे हम क्रोशिये से बने बिकीनी वेअर बना रहे हैं, जो ग्राहकों में काफी प्रचलित हो रहे हैं। आज हमारे इस काम से हरियाणा की 200 महिलाओं को गुरुग्राम के सोहना उपमंडल के गांव खेड़ला, भोंडसी और धामडोज़  में रोज़गार उपलब्ध करवाया जा रहा है। महिलाएं जब मेरे पास आ कर कहती हैं कि आज उन्होंने अपने बच्चों की फीस खुद दी है तो उनके ये शब्द मुझे और भी आगे बढ़ने की हिम्मत दे जाते है। वे कहती हैं कि इस कामयाबी का श्रेय वह हरियाणा सरकार और उनकी नीतियों को देती है जिसने उन्हें आगे बढ़ने का मंच प्रदान किया।

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