रोहतक में फिर जेएलएन ने ली युवक की बलि

रोहतक में फिर जेएलएन ने ली युवक की बलि

रोहतक में फिर जेएलएन ने ली युवक की बलि

हतक। रोहतक की सबसे बड़ी जेएलएन नहर अभी तक कई लोगों की बलि ले चुकी है। प्रशासन लोगों को कई बार चेतावनी भी दे चुका है कि यहां नहाने न जाएं। खुद डीसी जुर्माना लगाने की बात कह चुके हैं लेकिन फिर भी युवा नहीं मानते और यहां नहाने और शराब पार्टियां करने चले आते हैं। पिछले कुछ दिनों में इस नहर से करीब 6 शव मिल चुके हैं, लेकिन फिर भी लोग यहाँ आकर नहाने का मोह नहीं छोड़ पा रहे। रविवार को भी सेक्टर-4 में जेएलएन नहर में नहाते वक्त एक 28 वर्षीय युवक डूब गया, जिसका शव 27 घंटे बाद मौके से डेढ किलोमीटर दूर नहर में मिला। मृतक का नाम विक्की है। 

पुलिस ने विक्की के परिजनों को बुलवाकर शव की शिनाख्त करवाई तथा शव को पीजीआई भिजवाया। आज मृतक का पोस्टमॉर्टम होगा। पुलिस ने विक्की  के दोस्तों को भी हिरासत में लिया है जो युवक के साथ नहाने गए थे। युवक के दोस्तों ने पुलिस को बताया कि नहाने से पहले सभी ने नहर के किनारे पर बैठकर शराब पी थी।


मृतक के भाई गोपाल ने पुलिस को बताया कि वह भिवानी चुंगी स्थित शिव नगर का रहने वाला है। उसका भाई विक्की एक फैक्ट्री में काम करता था। शनिवार को वह नाइट ड्यूटी कर रविवार सुबह घर पर आया। घर आते ही उसके दोस्तों का फोन आ गया। विक्की ने फोन पर दोस्तों को कहा जिनको वह यह कह रहा था कि ठीक है मैं आ रहा हूं। मैंने बैग रख दिया है, तू बाइक लेकर गली में आजा। 2 मिनट बाद उसका दोस्त गली में बाइक लेकर आ गया।वह घर से अपने दोस्त के साथ बाइक पर सवार होकर चला गया।

दोपहर को विक्की के फोन से उसके दोस्त ने सूचना दी कि विक्की नहर में डूब गया है। सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे। दोस्तों ने ही मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस को दोस्तों ने बयान दर्ज करवाए कि वे चार लोग नहर पर बैठकर शराब पार्टी कर रहे थे। इसके बाद वे नहाने लगे तो विक्की नहर में डूब गया। विक्की के नहर में डूबने पर एक दोस्त डर कर वहां से भाग गया। विक्की के मोबाइल फोन पर लॉक लगा हुआ था, जिस वजह उन्होंने मोबाइल की सिम निकाल कर अपने फोन में डाली और परिजनों को सूचित किया।

रविवार को दोपहर 1 बजे पुलिस को सूचना दी गई थी। पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची थी। यहां गोताखोरों की टीम भी बुलाई गई थी। रविवार को गोताखोरों के पास एक ऑक्सीजन सिलेंडर था, वह भी नहीं चला। जिसके चलते परिजनों ने अपने स्तर पर ही रिस्क उठा कर उसकी नहर में तलाश की थी। सोमवार दोपहर करीब 1 बजे गोताखोर नहर किनारे पहुंचे। नाव भी लाए थे। एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद किश्ती को किसी तरह नहर में उतारा गया। किश्ती को चलाने की कई कोशिशें की गई, मगर किश्ती नहीं चली। वहीं, प्रशासन हर बार आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए नाव , ऑक्सीजन सिलेंडर, गोताखोरों सहित अन्य चीजों की पूर्ण मात्रा के बड़े-बड़े दावा करता है। इस हादसे के बाद प्रशासन के दावों की पोल खुल गई है।