किसान आंदोलन पर संघ ने तोड़ी चुप्पी देश विरोधी ताकतें नहीं निकलने दे रहीं समाधान

किसान आंदोलन पर संघ ने तोड़ी चुप्पी  देश विरोधी ताकतें नहीं निकलने दे रहीं समाधान

देश में कई महीने से चल रहे किसान आंदोलन पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने पहली बार अपनी राय रखी है। उन्होंने शुक्रवार (19 मार्च) को दावा किया कि 'राष्ट्र विरोधी' और 'असामाजिक' ताकतें केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन का समाधान निकालने के प्रयासों को विफल करने का प्रयास कर रही हैं। संघ ने कहा कि किसी भी प्रदर्शन का बहुत लंबे समय तक जारी रहना किसी के भी हित में नहीं है।

 एबीपीएस की बैठक में रखी राय 
संघ ने कहा, 'हर मुद्दे पर चर्चा आवश्यक है और कुछ सहमतियों पर पहुंचना भी जरूरी है,भले ही सारे मुद्दों का समाधान न निकले। गौरतलब है कि संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) की दो दिवसीय बैठक शुक्रवार से आरंभ हुई, जिसमें किसान आंदोलन पर भी चर्चा की गई।

 करीब 100 दिन से चल रहा किसान आंदोलन 
बता दें कि देश की राजधानी दिल्ली में सौ से भी अधिक दिनों से किसान आंदोलन चल रहा है। इसके तहत किसान केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही, इन कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

 आंदोलन पर आरएसएस ने कही यह बात 
आरएसएस ने रिपोर्ट-2021 में कहा कि किसी भी तरह का आंदोलन लंबे समय तक चले,यह किसी के हित में नहीं है। चर्चा आवश्यक है,लेकिन यह चर्चा समाधान निकालने के विचार के साथ होनी चाहिए। संभव है कि सभी मुद्दों पर सहमति न बन पाए, लेकिन किसी न किसी सहमति पर पहुंचना भी बेहद जरूरी है। संघ ने चिंता जताते हुए कहा कि आंदोलन के कारण दैनिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है, जिससे यह समस्या और गंभीर हो गई है।

 इस वजह से नहीं निकल रहा समाधान 
संघ ने बताया कि राष्ट्र विरोधी और असामाजिक ताकतें समाधान निकालने के प्रयासों को विफल करने का प्रयास कर रही हैं। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान आंदोलन के नेतृत्व को ऐसे हालात बनने नहीं देने चाहिए। हमें महसूस हो रहा है कि कुछ समय से राष्ट्र विरोधी ताकतें देश में गड़बड़ी और अस्थिरता का माहौल बनाने की कोशिश कर रही हैं,जिससे वे अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षाओं को पा सकें। 

 गंभीर प्रयासों से दूर हो सकती है हर समस्या 
संघ ने कहा कि ऐसी कोई समस्या नहीं होती, जिसका समाधान न हो। जरूरत है तो बस गंभीर प्रयासों की। लोकतंत्र में सभी को अपने विचारों को अभिव्यक्त करने की आजादी है, लेकिन किसी को भी देश में गड़बड़ी फैलाने तथा अस्थिरता पैदा करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। संघ ने कहा कि यह आंदोलन समय के साथ तेज हुआ है।