रक्षक ही बने भक्षक, खाकी फिर हुई शर्मसार, दो कांस्टेबल गिरफ्तार

रक्षक ही बने भक्षक, खाकी फिर हुई शर्मसार, दो कांस्टेबल गिरफ्तार

रक्षक ही बने भक्षक, खाकी फिर हुई शर्मसार, दो कांस्टेबल गिरफ्तार


नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में खाकी एक बार फिर शर्मसार हो गई है। कहते है कि कानून के रक्षक ही जब भक्षक बन जाए तो फिर किसी और से न्याय की उम्मीद तक नहीं की जा सकती है। बता दें कि दिल्ली पुलिस ने अपने ही विभाग के दो कॉन्स्टेबल को एक बिजनेसमैन के अपहरण और फिर फिरौती वसूल करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी पुलिसकर्मियों के नाम प्रमोद और सुमित है। दोनों फिलहाल फर्स्ट बटालियन में तैनात थे। पुलिस के मुताबिक ये दोनों प्रसाद नगर और देश बंधु गुप्ता थाना इलाके में चल रही जीन्स फैक्टिरी और स्पेयर पार्ट्स फैक्टिरी के मालिक से बड़ी बड़ी कंपनी के नकली माल बनाने का आरोप लगाकर जबरन उगाही कर रहे थे। 

दिल्ली पुलिस के मुताबिक आरोपी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल अभी तक इनके इन्ही दो मामलों में शामिल होने की बात सामने आई है। पुलिस इसी मोडस ओपेरण्डी से दिए गए कुछ और मामलों की भी पड़ताल कर रही है कि कहीं ये इस तरह की कोई और वारदातों में शामिल तो नही थे। 

पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर लिया। पुलिस के मुताबिक इसी दौरान देश बंधु गुप्ता थाना इलाके में भी स्पेयर पार्ट्स बनाने वाले एक व्यापारी ने भी शिकायत दी थी। दिल्ली पुलिस में डीसीपी जसमीत सिंह ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस को एक सीसीटीवी फुटेज में आरोपियों की आई10 गाड़ी नज़र आई। पुलिस ने जब गाड़ी के नंबर से पड़ताल बढ़ाई तो आरोपी पुलिसकर्मियों तक पहुँची. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक ये गाड़ी आरोपी पुलिसकर्मी के रिश्तेदार की थी। पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला है कि इनका एक तीसरा साथी मंजीत भी इनके साथ शामिल था। जिसकी पुलिस तलाश कर रही है। 

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक़ प्रसाद नगर थाना में जीन्स फैक्टिरी चलाने वाले व्यापारी ने शिकायत की थी कि कुछ पुलिस कर्मियों ने उसकी फैक्टिरी में पहुंचकर उसे बड़े ब्रांड की नकली जीन्स बनाने के नाम पर पहले धमकाया और फिर उसका अपनी गाड़ी में अपहरण कर लिया। शिकायत के मुताबिक ये लोग उसे अपनी गाड़ी में घुमाते रहे और 5 लाख की डिमांड की। बाद में मामला 3 लाख रुपये में तय हुआ. और जब पीड़ित का रिश्तेदार 3 लाख रुपये लेकर पहुँचा तब उसे छोड़ा गया।