दुनिया भर में फिर मचेगा हाहाकार! फैल सकती है 'काली मौत' नाम की महामारी

दुनिया भर में फिर मचेगा हाहाकार! फैल सकती है 'काली मौत' नाम की महामारी

दुनिया भर में फिर मचेगा हाहाकार! फैल सकती है 'काली मौत' नाम की महामारी

नई दिल्ली। दुनिया भर में कोरोना ने इस कदर कहर बरपाया था कि हर कोई सहम गया था। हालांकि अभी कोरोना का खतरा टला नहीं है। लेकिन इसी बीच एक और डरावनी या यूं कहें की बुरी खबर सामने आ रही है। दरअसल एक डॉक्टर ने चेतावनी दी है कि एक बार फिर से दुनिया भर में खतरनाक महामारी 'काली मौत' फ़ैल सकती है।  रूस की एक बड़ी डॉक्टर ने चेतावनी दी है कि अगर लोग बढ़ती वैश्विक गर्मी यानी ग्लोबल वार्मिंग को कम नहीं करेंगे तो दुनिया में ब्यूबोनिक प्लेग का खतरा बढ़ जाएगा। इस बीमारी ने पहले भी पूरी दुनिया में लाखों लोगों को मारा है।  इस जानलेवा बीमारी का दुनिया में तीन बार हमला हो चुका है। पहली बार इसे 5 करोड़, दूसरी बार पूरे यूरोप की एक तिहाई आबादी और तीसरी बार 80 हजार लोगों की जान ली थी। इसे ब्लैक डेथ या काली मौत भी कहते हैं। 

अब ये महामारी कैसे होती है ये भी जान लेते है। ब्यूबोनिक प्लेग जिस बैक्टीरिया की वजह से होता है उसका नाम है यर्सिनिया पेस्टिस बैक्टीरियम। यह बैक्टीरिया शरीर के लिंफ नोड्स, खून और फेफड़ों पर हमला करता है। इससे उंगलियां काली पड़कर सड़ने लगती है। नाक के साथ भी ऐसा ही होता है। ब्यूबोनिक प्लेग को गिल्टीवाला प्लेग भी कहते हैं। इसमें शरीर में असहनीय दर्द, तेज बुखार होता है। नाड़ी तेज चलने लगती है। 

दो-तीन दिन में गिल्टियां निकलने लगती हैं। 14 दिन में ये गिल्टियां पक जाती हैं। इसके बाद शरीर में जो दर्द होता है वो अंतहीन होता है। ब्यूबोनिक ब्लेग सबसे पहले जंगली चूहों को होता है। चूहों के मरने के बाद इस प्लेग का बैक्टीरिया पिस्सुओं के जरिए मानव शरीर में प्रवेश कर जाता है। इसके बाद जब पिस्सू इंसानों को काटता है वह संक्रामक लिक्विड इंसानों के खून में छोड़ देता है। बस इसी के बाद इंसान संक्रमित होने लगता है। चूहों का मरना आरंभ होने के दो तीन सप्ताह बाद मनुष्यों में प्लेग फैलता है। 

दुनिया भर में ब्यूबोनिक प्लेग के 2010 से 2015 के बीच करीब 3248 मामले सामने आ चुके हैं। जिनमें से 584 लोगों की मौत हो चुकी है। इन सालों में ज्यादातर मामले डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो, मैडागास्कर, पेरू में आए थे। इससे पहले 1970 से लेकर 1980 तक इस बीमारी को चीन, भारत, रूस, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण अमेरिकी देशों में पाया गया है। 

रूस की बड़ी डॉक्टर अन्ना पोपोवा ने कहा कि ब्यूबोनिक प्लेग के लौटने की आशंका इसलिए ज्यादा है क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले कुछ सालों में रूस, चीन और अमेरिका में काली मौत के मामले सामने आए हैं। डॉ. अन्ना पोपोवा ने कहा कि इसका भयानक रूप अफ्रीका में देखने को मिल सकता है, क्योंकि वहां इसके फैलने की आशंका काफी ज्यादा है। 

डॉ. अन्ना पोपोवा ने कहा कि पर्यावरण में लगातार हो रहे बदलाव की वजह से जलवायु परिवर्तन हो रहा है। वैश्विक गर्मी बढ़ रही है। इन वजहों से कम होने वाली बीमारियों जैसे ब्यूबोनिक प्लेग के दोबारा से सिर उठाने की आशंका बढ़ रही है। हमें पता है कि काली मौत के मामले साल-दर-साल दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सामने आ रहे हैं, लगातार इनकी संख्या बढ़ भी रही है। क्योंकि इस बीमारी को फैलाने वाली मक्खियों की संख्या में इजाफा हो रहा है।