27 से मोरनी में पैराग्लाइडिंग, ट्रैकिंग, वाटर बोट, हॉट-एयर बैलून राइड का आनंद उठा सकेंगे पर्यटक

27 से मोरनी में पैराग्लाइडिंग, ट्रैकिंग, वाटर बोट, हॉट-एयर बैलून राइड का आनंद उठा सकेंगे पर्यटक

चंडीगढ़: लंबे समय से कोरोना के कारण भारी घाटे की मार झेल रहे पर्यटन विभाग को लाभ की स्थिति में लाने के लिये विभाग ने कई तरह के प्रयोगों का मन बनाया है। ताकि अपने ही नहीं बल्कि दूसरे प्रदेशों के पर्यटक भी आकर्षित हो सकें। इसे लेकर एक बड़ी कार्य योजना तैयार की गई है। बता दें कि पड़ोसी पर्वतीय राज्य हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हरियाणा के बड़ी मात्रा में पर्यटक पूरा साल घूमने के लिए जाते हैं और गर्मी के सीजन में तो हरियाणा के पर्यटक इन प्रदेशों के खजाने में भारी बढ़ोतरी का बड़ा माध्यम बनते हैं और वहीं दूसरी तरफ खुद अपने प्रदेश का पर्यटन विभाग भारी घाटे की मार झेल रहा है। इसी के चलते प्रदेश सरकार ने प्रदेश के पर्यटकों को लुभाने के लिए पूरी रूपरेखा तैयार की है। जिसे लेकर 27 सितंबर से मोरनी हिल्स में वाटर स्पोर्ट्स और पैराग्लाइडिंग, ट्रैकिंग, वाटर बोट की शुरूआत हो जाएंगी। 

इसके साथ-साथ यमुनानगर के हथनीकुंड बैराज और रोहतक की तिलयार झील में भी वाटर स्पोर्ट्स ओर एडवेंचर गतिविधियां शुरू करने के प्रयोग पर विचार किया जा रहा है। यह जानकारी प्रदेश के पर्यटन मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 20 जून को मोरनी हिल्स में वाटर स्पोर्ट्स, पैराग्लाइडिंग व हॉट-एयर बैलून की शुरूआत की थी। एडवेंचर से जुड़ी एक प्राइवेट कंपनी को इसका ठेका दिया गया था। लेकिन कुछ नियम व शर्तों में बदलाव की वजह से 20 जून को हुए ट्रायल के बाद से ये गतिविधियां बंद थी। अब सरकार ने ट्रायल गतिविधियों को मंजूरी दे दी है। साथ ही, नियम एवं शर्तों में भी बदलाव कर दिया है। ये औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अब 27 को सरकार नियमित रूप से मोरनी हिल्स में वाटर स्पोर्ट्स, पैराग्लाइडिंग व हॉट-एयर बैलून शुरू करेगी।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि पैराग्लाइडिंग, हॉट एयर बैलून आदि खेलों के लिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। लेकिन उसके बावजूद इन खेलों में थोड़ा बहुत रिस्क रहता है। जिसे लेकर कुछ नियम बनाए गए हैं। जिसमें इंश्योरेंस आदि की व्यवस्था रखी गई है। साथ ही साथ इसके लिए एक्सपर्ट लोगों की टीम द्वारा ही चलाए जाने के नियम लागू कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बरसात से पहले मोरनी-टिक्कर ताल जाने वाली सड़कें जो बिल्कुल ठीक थी, बरसात आने के बाद उनकी हालत खराब हो गई है। बरसात का सीजन खत्म होते ही उनकी रिपेयरिंग का काम भी तुरंत शुरू हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि मोरनी की तर्ज पर ही यमुनानगर के हथनीकुंड बैराज और रोहतक की तिलयार झील में भी ऐसी गतिविधियां शुरू करने को कह दिया गया हैं। इसके लिए विभाग तैयारियों में लग गया है। ताकि यह दोनों जगह भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने। मोरनी की पहाड़ियों के मनोहर नजारों के अलावा जंगलों में घूमने वाले जानवर भी अब पर्यटक देख सकेंगे। हॉट एयर बैलून, वाइल्ड लाइफ सफारी शुरू होने से पर्यटक इस एडवेंचर गेम का आनंद उठा सकेंगे। मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले साल ही दिसंबर में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हॉट एयर बैलून, वाइल्फ लाइफ सफारी की शुरूआत की थी। इसी तर्ज पर मोरनी हिल्स में यह सुविधा शुरू की गई है। 

हथनी कुंड बैराज पर गेस्ट हाउस भी है। जहां बड़ी संख्या में पर्यटक भी आते हैं, लेकिन अभी पर्याप्त सुविधाएं यहां उपलब्ध नहीं हैं। हॉट एयर बैलून, वाटर स्पोर्ट्स व पैराग्लाइडिंग शुरू होने के बाद हथनी कुंड बैराज बड़ा पर्यटक केंद्र विकसित हो सकता है। दिल्ली के नजदीक होने की वजह से रोहतक की तिलयार लेक में पर्यटकों की संख्या काफी अधिक रहती है। यहां टूरिज्म होटल, रेस्टोरेंट के अलावा लेक में वोटिंग की सुविधा भी है। तिलयार पर 'जू' भी है। ऐसे में सरकार ने इस जगह को भी बड़े पर्यटक केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। 

ऐतिहासिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माने जाने वाले महेंद्रगढ़-नारनौल को भी सरकार ने अपने एजेंडे में शामिल किया है। महेंद्रगढ़ स्थित माधोगढ़ फोर्ट के अलावा अरावली हिल्स पर स्थापित महर्षि च्यवन की तपोभूमि ढोसी भी पर्यटकों को आकर्षित करेगा। पूर्व शिक्षा व पर्यटन मंत्री प्रो़ रामबिलास शर्मा के समय से इस पर काम चल रहा है। इसी तरह से नारनौल में सम्राट शेरशाह सूरी द्वारा निर्मित उनके दादा इब्राहिम खान का मकबरा, जल महल, शाहकुली खान का मकबरा, राय बालमुकुंद का छत्ता भी काफी प्रसिद्ध है। इसे बीरबल के छत्ते के नाम से भी जाना जाता है। तख्त वाली बावड़ी, चोर गुम्बद और शेख मिहिंरा की दरगाह भी पर्यटकों के लिए अच्छी जगह साबित हो सकती है। यहां स्थित चामुंडा देवी के ऐतिहासिक मंदिर के प्रति भी लोगों में बड़ी आस्था है।