पंचायती राज कानून में संशोधन : पहली बैठक से पांच वर्ष तक ही रहेगा पंचायतों का कार्यकाल

पंचायती राज कानून में संशोधन : पहली बैठक से पांच वर्ष तक ही रहेगा पंचायतों का कार्यकाल

हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन सदन में अन्य विधेयकों के साथ-साथ हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2021 भी पारित किया गया। ताज़ा संशोधन द्वारा हरियाणा पंचायती राज अधिनियम,1994 के प्रावधानों को भारत के संविधान के प्रावधानों के अनुरूप लाने के लिए ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों व जिला परिषदों के पांच वर्ष के कार्यकाल की शुरूआत की तिथि इनकी पहली बैठक के लिए नियत तिथि से ही तय होगी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि एक वर्ष पूर्व मार्च, 2020 में विधानसभा के तत्कालीन बजट सत्र दौरान हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2020 भी पारित किया गया था। जिसके द्वारा हरियाणा पंचायती राज अधिनियम,1994 की अन्य धाराओं में संशोधन करने के साथ ही उसकी मूल धारा 3(1) को भी पूर्णतया परिवर्तित कर किया गया था। सदन से पारित इस विधयेक को 20 अप्रैल 2020 को हरियाणा के राज्यपाल की स्वीकृति हुई एवं 4 मई 2020 को हरियाणा के गजट में प्रकाशित होने के बाद यह विधिवत रूप से प्रदेश में कानून बन लागू हो भी गया था। इस संशोधित कानून की उक्त धारा द्वारा प्रदेश की पंचायती राज संस्थाओ अर्थात ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद का कार्यकाल राज्य चुनाव आयोग द्वारा इनके नव-नर्विाचित प्रतिनिधियों के नाम अधिसूचित करने सम्बन्धी जारी नोटिफिकेशन से पांच वर्ष तक कर दिया गया था

हेमंत ने जून, 2020 में प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री (जिनके पास पंचायत विभाग भी है), मुख्य सचिव, विकास एवं पंचायत विभाग के प्रशासनिक सचिव आदि को लिखा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 (ई ) के अनुसार किसी भी नर्विाचित पंचायत अर्थात हर पंचायती राज संस्था का कार्यकाल उसके निर्वाचन के बाद बुलाई गई पहली बैठक से पांच वर्ष तक होता है बशर्ते वह समयपूर्व भंग न हो जाए। हरियाणा पंचायती राज कानून, 1994 की मूल धारा 3(1) में भी ऐसा ही उल्लेख हुआ करता था जो कि बिलकुल उचित एवं संवैधानिक था परन्तु मार्च, 2020 में किए गया उपरोक्त संशोधन सर्वथा गलत है. पिछले वर्ष किया गया उक्त संशोधन हालांकि तत्कालीन पंचायती राज संस्थाओ पर नहीं बल्कि वर्ष 2021 में होने वाले प्रदेश के छठे पंचायती आम चुनावों के पश्चात नर्विाचित पंचायती राज संस्थाओं पर ही लागू होना था.

चूँकि हरियाणा में पंचायती राज संस्थाओ के पिछले आम चुनाव तीन चरणो में जनवरी, 2016 में करवाए गए थे इसलिए इन सब का पांच वर्ष का संवैधानिक कार्यकाल फरवरी 2021 तक था अर्थात तत्कालीन निवार्चित उक्त संस्थाओ द्वारा अपनी बुलाई गयी पहली बैठक से पांच वर्षो तक. प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओ के आम चुनाव करवाना राज्य सरकार अर्थात पंचायत विभाग का कार्य नहीं होता बल्कि संविधान में 73 वे संशोधन अधिनियम, 1992 जिसे 24 अप्रैल, 1993 से लागू किया गया एवं जिसके द्वारा नए डाले गए अनुच्छेद 243(के) अनुसार देश के हर राज्य की पंचायती राज संस्थाओं अर्थात ग्राम पंचायतो, ब्लॉक अथवा पंचायत समितियों और जिला परिषदों के चुनावो का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण राज्य चुनाव/निर्वाचन आयोग के पास ही होता है। हालांकि प्रदेश के छठे पंचायती राज चुनाव इस वर्ष जनवरी-फरवरी तक हो जाने चाहिए थे परन्तु ऐसा नहीं हो सका एवं अब इनके अगले दो-तीन माह में होने की उम्मीद है।