सिरसा : श्री साईं कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड पर सीएम फ्लाइंग का छापा; फर्जी डिग्री व मुहर बरामद

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सिरसा : श्री साईं कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड पर सीएम फ्लाइंग का छापा; फर्जी डिग्री व मुहर बरामद

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हरियाणा में सिरसा के द्वारकापुरी में श्री साईं कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम से संचालित एक निजी संस्थान में वीरवार को CM फ्लाइंग टीम ने दबिश दी। जांच के दौरान बीएससी एग्रीकल्चर, छत्तीसगढ़ शिक्षा बोर्ड और यूपी के कई विश्वविद्यालयों की डिग्रियां मिली हैं। टीम के सदस्यों ने यहां से 100 से अधिक डिग्रियां, शिक्षण संस्थानों की मुहर व कागज बरामद किए। प्रशासन की ओर से उड़नदस्ते में शामिल रानियां के राजकीय महिला कॉलेज के प्रिंसिपल बीएस भोला का कहना है कि शुरुआती तौर पर ऐसा लग रहा है कि इस संस्थान में फर्जी डिग्रियां बनाई जाती थीं। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
सब इंस्पेक्टर राजेश कुमार के नेतृत्व में मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने वीरवार को दोपहर 12 बजे संस्थान में दबिश दी। यहां पर चार-पांच लड़कियां ही काम करती हुई मिलीं। उड़नदस्ते ने इंस्टीट्यूट के ऑफिस को खंगालना शुरू कर दिया। यहां पर 100 से ज्यादा डिग्रियां, मार्कशीट, मुहरें व मार्कशीट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले कागज बरामद हुए। इसके बाद टीम ने संस्थान में लगे सीसीटीवी कैमरे भी चेक किए और फुटेज भी कब्जे में ली। टीम की कार्रवाई शाम पौने सात बजे तक चली। इसके बाद टीम ने संस्थान के संचालक को नोटिस देकर जल्द से जल्द पेश होने का आदेश दिया है।
ड्यूटी मजिस्ट्रेट प्रिंसिपल बीएस भोला ने बताया कि उक्त संस्थान का संचालन सिरसा निवासी सीताराम करता है। छापेमारी के दौरान वह मौके पर मौजूद नहीं था। यहां पर चार लड़कियां मिलीं, जो नौकरी करती हैं। इन लड़कियों ने बताया कि वे एक-दो महीने से यहां नौकरी कर रही हैं। संचालक की ओर से उन्हें पांच से छह हजार रुपये वेतन दिया जाता है। उनका काम केवल लोगों को फोन करना है। कब्जे में लिया गया सारा सामान संदिग्ध है। इसकी जांच की जाएगी।
दबिश के दौरान सीएम फ्लाइंग को 10वीं, 12वीं, बीएससी एग्रीकल्चर, छत्तीसगढ़ शिक्षा बोर्ड, यूपी के कई विश्वविद्यालय की डिग्रियां मिली हैं। आरोप है कि इंस्टीट्यूट की ओर से 500 से ज्यादा लोगों की फर्जी डिग्री बनाई जा चुकी है।
शुरुआती जांच में पता चला है कि उक्त इंस्टीट्यूट काफी समय से चल रहा है। सूत्रों का कहना है कि ये फर्जी डिग्री बनाने की एवज में 30 से 50 हजार रुपये लेते थे। पैसे लेने के बाद ये किसी भी यूनिवर्सिटी की डिग्री दे देते थे। इसके अलावा मार्कशीट बनाने के 10 से 15 हजार रुपये लिए जाते थे।

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